मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में “केंद्रीय बजट 2020-21” पर परिचर्चा का आयोजन

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भोपाल। मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयंत सोनवलकर जी की अध्यक्षता में ” केंद्रीय बजट 2020-21″ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। आईसीएआई की पूर्व सचिव श्रीमती विनीता माथुर बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित प्राध्यापकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आम बजट-2020 के प्रमुख बिन्दुओं से अवगत कराया।

श्रीमती विनीता माथुर ने बताया कि बजट में यह साफ किया गया है कि आयकरदाता दोनों में से किसी एक आयकर व्यवस्था को चुन सकता है। अब यह देखना होगा कि नौकरी पेशा और उद्योगपतियों के बीच में कौन सा आयकर दरें ज्यादा मुफीद होंगी। क्योंकि इसके साथ यह बताना जरूरी है कि अगर नई व्यवस्था की आयकर दरें उपभोक्ता लेगा तो उसे धारा 80 के तहत मिलने वाली छूट नहीं मिल पाएगी। ऐसे में उम्मीद यही रहेगी कि पांच लाख की सीमा के अन्दर आने वाले ज्यादातर लोग पुरानी आयकर व्यवस्था को ही अपनाएंगे। हालांकि उद्योगपति या पांच लाख की सीमा से ज्यादा कमाई करने वाले लोग आयकर दरों की नई व्यवस्था की तरफ रुख करना चाहेंगे।

कुलपति प्रोफेसर जयंत सोनवलकर ने बताया कि भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश में केंद्रीय बजट या सालाना बजट बड़ी रकम के सही प्रबंधन के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी वजह यह है कि केंद्रीय बजट का असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसमें अलग-अलग संस्कृति, जाति, क्षेत्र आदि के लोग शामिल हैं। केंद्रीय बजट बनाने और उसे पेश करने में काफी सावधानी बरती जाती है. इसमें पिछली बातों से सबक और आने वाले समय में जनता की जरूरत का ध्यान रखा जाता है।

परिचर्चा के दौरान कुलसचिव डॉ. एच.एस. त्रिपाठी, निदेशक डॉ. एल.पी. झरिया, डॉ. ए.के. त्रिपाठी, अन्य विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों से आये विद्यार्थी एवं कर्मचारीगण मौजूद रहे।

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