कमलनाथ का ‘शक्ति परीक्षण’: BJP की ‘धमकी’ बेअसर- उसी के दो विधायकों ने इस बिल पर दिया सरकार का साथ

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भोपाल। कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिराने के बाद मध्यप्रदेश की कमलनाथ (Kamal Nath)  सरकार को लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा. सदन में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि जिस दिन हमारे नंबर-1 और नंबर-2 कह देंगे यह सरकार एक दिन भी नहीं चल पाएगी. इस पर सीएम कमलनाथ ने चैलेंज देते हुए कहा था कि आपके नंबर-1 और नंबर-2 समझदार हैं, इसलिये आदेश नहीं दे रहें. आप चाहें तो अविश्वास प्रस्ताव ले आएं. बता दें कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने चैलेंज को शाम होते-होते पूरा भी कर दिया. उन्होंने विधानसभा में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बिल पास करवाने के बहाने सरकार का शक्ति परीक्षण कर दिया. इस दौरान सरकार के समर्थन में बहुमत से ज्यादा वोट पड़े. खास बात यह रही है बीजेपी के दो विधायकों ने ही कमलनाथ सरकार के इस बिल का समर्थन कर दिया. एमपी की कमलनाथ सरकार को इस दौरान 122 मत मिले.

इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, ‘ये बहुमत सिद्ध करने का मतदान है. इसमें बीजेपी के दो सदस्यों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने सरकार का साथ दिया. हमें 122 मत मिले. हमारी सरकार अल्पमत की सरकार नहीं है. उधर, नारायण त्रिपाठी ने कहा कि घर वापसी हुई है.

इससे पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था कि रोज-रोज अल्पमत की सरकार की ढोलकी बजाते रहते हैं, आज हो ही जाये आर पार. वहीं हंगामे के बीच बसपा विधायक रामबाई ने कहा कि कमलनाथ सरकार अंगद के पांव की तरह अडिग है. पैसे दोगे तो खा भी लेंगे और साथ भी नहीं देंगे.

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