स्विट्जरलैंड की तर्ज पर मध्यप्रदेश में बनेगा ‘टाइम बैंक’

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भोपाल। कमलनाथ सरकार मध्यप्रदेश में अनूठा प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत स्विट्जरलैंड की तर्ज पर प्रदेश में ‘टाइम बैंक’ बनाया जाएगा। जैसे बुरे दौर के लिए बैंक में पैसा रखा जाता है, उसी तरह इसमें आम आदमी अपने बुरे समय के लिए ‘टाइम’ को रिजर्व रख पाएगा। जिस प्रकार पैसों के लिए बैंक काम करता है, उसी प्रकार टाइम बैंकिंग के लिए सरकार बैंक भी तैयार करेगी। यह संभवत: देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा।

एकमात्र स्विट्जरलैंड में टाइम बैंक

टाइम बैंक का सबसे ज्यादा फायदा अकेले रहने वाले और दूसरे जरूरतमंद लोगों को होगा, जिन्हें एक निश्चित समय के लिए दूसरों के समय की जरूरत होती है। अभी दुनिया में एकमात्र स्विट्जरलैंड में टाइम बैंक है। वहां की सोशल लाइफ काफी बेहतर मानी जाती है। कोई भी व्यक्ति वहां टाइम बैंकिंग करके बुरे वक्त में अपने लिए देख-रेख हासिल कर लेता है। इसी कारण मध्यप्रदेश में इस पर काम शुरू हो गया है। सरकार ने इसके लिए कॉन्सेंप्ट नोट को सहमति दे दी है।

बुजुर्गों को बड़ा फायदा

टाइम बैंक का सबसे ज्यादा फायदा अकेले रहने वाले और बुजुर्गों को मिलेगा। इनके पास देख-रेख करने वाले कम ही होते हैं। वहीं, टाइम बैंक से सोशल सर्विस सेक्टर में भी बूम आने की संभावना है। अभी हजारों समाजसेवी हैं, लेकिन उनकी समाजसेवा को कोई काउंट नहीं करता। वे टाइम बैंक में रजिस्ट्रेशन कराकर अपनी समाजसेवा के टाइम को रिजर्व करा सकेंगे।

बनेगा ट्रस्ट रूपी बैंक

टाइम बैंक की एक सरकारी बॉडी होगी, जिसमें ट्रस्ट की तरह गवर्निंग अथॉरिटी काम करेगी। इसका सॉफ्टवेयर तैयार होगा, जिसमें टाइम मैनेजमेंट के डाटा अपडेट होंगे। हर व्यक्ति का सत्यापन करके उसका एक टाइम बैंक खाता होगा, जिसमें टाइम रिजर्व होता जाएगा। टाइम बैंकिंग में टाइम देने वालों को बाद में दूसरा व्यक्ति जाकर अपना टाइम देगा, इसलिए सत्यापन जरूरी रहेगा।

राज्य स्तर से गांव तक होगी बैंकिंग

सरकार ने इसे बड़े कॉन्सेप्ट के रूप में तैयार करना शुरू किया है। राज्य स्तर पर टाइम बैंक बनाने के बाद संभाग, जिला, तहसील और गांव स्तर तक इसकी शाखाएं तैयार होंगी। टाइम बैंक की सेवाएं लेने के लिए आपको इससे वॉलेंटियर्स के तौर पर जुडऩा होगा। बैंक जरूरत के अनुसार अपने खाताधारक के यहां मदद के लिए वॉलेंटियर्स को सेवा के लिए भेज सकेगी। टाइम बैंक का नेटवर्क ब्लॉक स्तर तक तैयार किया जाएगा। इसमें कम खर्च में अधिक नेटवर्किंग हो सकेगी, क्योंकि इसमें लागत से ज्यादा टाइम व कॉन्सेप्ट लगना है। इसी कारण सरकार इस किफायती, लेकिन अनूठे मॉडल पर तेजी से काम करने की तैयारी कर रही है।

ऐसे होगी टाइम बैंकिंग

यदि आप आज किसी व्यक्ति की सेवा में अपना समय देंगे तो उसे बाद में कभी भी निश्चित समय के लिए पा सकेंगे। मसलन, आप यदि तीन महीने तक एक घंटे रोज किसी व्यक्ति, संस्था या जगह पर समाजसेवा करते हैं या अन्य प्रकार से समय देते हैं तो तीन महीने में खर्च किए गए 90 घंटे टाइम बैंक में जमा हो जाएंगे।

टाइम एक साथ खर्च करना चाहते हैं या फिर किस्तों में

भविष्य में कभी बीमार होने या फिर अन्य प्रकार से किसी व्यक्ति की जरूरत पडऩे पर आप बैंक में जमा टाइम का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए आपको टाइम बैंक को ई-मेल या फोन करना होगा। बैंक आपके खाते में जमा टाइम के अनुसार आपके लिए एक अन्य वॉलेंटियर को सेवा के लिए भेजेगा।

ये आप पर निर्भर करता है कि आप बैंक में जमा टाइम एक साथ खर्च करना चाहते हैं या फिर किस्तों में। इतना हीं नहीं, बैंक में जमा किए गए टाइम पर बैंक ब्याज के रूप में अतिरिक्त घंटे देगा। जिससे जरूरतमंद व्यक्ति आवश्यकता पडऩे पर बैंक में जमा टाइम से ज्यादा टाइम तक अपनी देखरेख या अन्य कार्य के लिए वालेंटियर की सेवा ले सकेगा।

टाइम बैंक बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। अभी स्विट्जरलैंड में इस तरह का मॉडल है। इस टाइम बैंक को बनाना बड़ा प्रयोग है। इस पर प्रारंभिक रूप से हम सहमत हैं।
पीसी शर्मा, मंत्री, विधि-अध्यात्म विभाग

हम मध्यप्रदेश में टाइम बैंक बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसका कांसेप्ट नोट तैयार कर लिया गया है। इसे बनाते हैं तो लोगों की उनके बुरे समय में भी देख-रेख हो सकेगी।
मनोज श्रीवास्तव, एसीएस, अध्यात्म

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