“अर्थ गंगा”: नदी संरक्षण समन्वित विकास

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ब्यूरो चीफ़ आरिफ़ मोहम्मद कानपुर

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG), GoI और गंगा रिवर बेसिन मैनेजमेंट एंड स्टडीज (cGanga), आई आई टी कानपुर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित 5-दिवसीय 5वें इंडिया वॉटर इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन (IWIS) 10 से 15 दिसंबर 2020 के बीच आभासी (वर्चुअल) माध्यम से आयोजित किया गया।शिखर सम्मेलन में हजार से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों, एवं विशेषज्ञों ने छोटी नदियों और जलनिकायों के व्यापक और समग्र प्रबंधन समन्वित विकास पर चर्चा की। चर्चाओं में अर्थगंगा” के सिद्धांत पर उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, और बिहार के प्रमुख विकास क्षेत्रों ऊर्जा, पर्यटन, मानव बंदोबस्त, कृषि, नेविगेशन और बाढ़ प्रबंधन पर नदी संरक्षण के साथ समन्वित रूप से कैसे कार्य किया जावे पर विचार मंथन किया गया।

सम्मेलन के प्रथम दिन उद्घाटन करते हुए, जल शक्ति मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत एवं राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने जल क्षेत्र में सरकार की पहल के बारे में बताया और लोगों की भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। शेखावत ने विकास के साथ तालमेल के लिए नदी संरक्षण के लिए अर्थ गंगा की गहन समझ पर भी जोर दिया और भारत में आर्थिक विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के एक साथ आगे बढ़ने के लिए बन रहे नए माहौल की सराहना की।

बाद में, शिखर सम्मेलन के दौरान, NITI Aayog के सी.ई.ओ, अमिताभ कांत (IAS) ने नदियों के वर्तमान दुरुपयोग और प्रदूषण को रोकने एवं नदी संरक्षणके लिए विज्ञान के उपयोग के साथ इस कार्य के लिए जुनून के होने की आवश्यकता को समझाया। उन्होंने सभी विकासात्मक गतिविधियों में स्थिरता सुनिश्चित करने पर जोर दिया, और कहा कि स्थानीय स्तर पर वर्षा जल संरक्षण से अधिकांश स्थानीय पानी की जरूरतें हल हो सकती हैं। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह तोमर ने गंगा के साथ सभी नदियों के संरक्षण और स्थायी समाधान के लिए हमारी जीवन शैली को बदलने पर जोर दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में गंगा में बहने वाली अधिकांश प्रदूषित धाराओं को रोक दिया गया है, और गंगा की सहायक नदियों का संरक्षण अब तेजी से हो रहा है। विजय कुमार चौधरी, बिहार के जल संसाधन मंत्री, ने बिहार की भौगोलिक स्थिति और नदी की सिल्टेशन समस्याओं के कारण बिहार में बाढ़ प्रबंधन की समस्याओं की व्याख्या की, और एक राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की मांग की।

सम्मेलन मे अपनी बात रखने वाले अन्य वक्ताओं में जल शक्ति मंत्रालय सचिव यू.पी. सिंह ने गंगा के लिए एक बुनियादी जरूरत के रूप में “अविरलता” पर जोर दिया, और नदियों के निर्मलता को बनाए रखने के लिए स्थायी बुनियादी ढांचों के निर्माण पर जोर दिया। आर. आर. मिश्रा (डीजी, एन एम सी जी) ने नदी शहर गठबंधनों की आवश्यकता और इस दिशा में एनएमसीजी के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। सीगंगा प्रमुख प्रो विनोद तारे ने “विकास” और “नदी संरक्षण” को एक ही सिक्के के दो पहलू के रूप में वर्णित किया, और कहा कि अर्थ गंगा दोनों पहलुओं को एक साथ स्वीकार करती है। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थ-गंगा एवं वॉकल फॉर लोकल जैसे मंत्रों के माध्यम से नदी संरक्षण से जुड़े हुए जटिल सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दों को आसानी से समझा जा सकता है। एस के राठो (ADG, वन) ने सरकार के वन इको-टूरिज्म कार्यक्रम के बारे मे बताया एवं इसका “कार्बन फुटप्रिंट” को कम करने मे योगदान को समझाया। नीदरलैंड्स स्थित डेल्टारेस के श्री कीस बोन्स ने 2008 बिहार बाढ़ के बारे मे बताते हुए नदियों के मार्ग मे परिवर्तन के साथ नदी की स्थिरता मे तलछट (गाद) की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की।

शैक्षणिक, सरकारी संगठनों, थिंक-टैंक, एनजीओ और उद्योग के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी शिखर सम्मेलन के विभिन्न विषयों पर चर्चा की और महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जैसे:
स्थायी ऊर्जा उत्पादन और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और नदी संरक्षण का विकास करना।
• विकास के अर्थशास्त्रमें नदी के सामान और सेवाओं का आर्थिक मूल्यांकन और समावेश;
• फसल विविधीकरण और अंतर-फसल, एकीकृत खेती, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई, बागवानी संवर्धन, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सामुदायिक खेती मे उपयोगी संसाधनों का विकास, और कृषि उपज में पानी और बिजली के मूल्य समावेश द्वारा कृषि का सुधार करना।
• ड्रेजिंग के बजाय बांस बांधने और सतह चौखटा द्वारा नदियों का सिल्टेशन नियंत्रण, और बैंक कटाव की जाँच करने के लिए वनस्पति उपाय के माध्यम से नदी के जल जीवों हेतु उपयुक्त निवास स्थान प्रदान करना।
• शहरी नियोजन में शहरी नदी और “नाला” संरक्षण को सम्मिलित करना।
• गंगा डॉल्फिन जैसी प्रमुख प्रजातियों के लिए सुरक्षा उपायों के साथ सतत नदी नेविगेशन विकास सुनिश्चित करना।
• नदी संरक्षण में लोगों को जागरूक करना और उन्हें शामिल करना ।
• नदी संरक्षण के लिए ‘वॉकल फॉर लोकल’ जैसे सिद्धांत के माध्यम से सरक्युलर ईकानमी को बढ़ावा देना।
• उपचारित पानी के उपयोग और पानी के यतार्थ मूल्य का निर्धारण करना।
• पर्यावरणीय समस्याओं को पूरा करने के लिए तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना।

15 दिसम्बर 2020 को आयोजित समापन समारोह मे, केंद्री यमंत्री हरदीप सिंह पुरी, गजेन्द्र सिंह शेखावत, रतन लाल कटारिया एवं राजीव कुमार (उपाध्यक्ष, नीतीयोग) ने NMCG और cGanga की सराहना की तथा शेखावत ने तो इस सम्मेलन को वैचारिक महाकुंभ के समान बताया। उन्होंने उपयुक्त शहरी प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और जल केंद्रित जन आंदोलनों से लेकर वर्षा जलसंचयन और भूजल प्रबंधन तक विभिन्न माध्यमों से नदी संरक्षण को समन्वित करने के सरकारी प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। शेखावत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि जिस प्रकार सब इस कोविड महामारी से जूझने के लिए एकजुट हो लड़ रहे हैं वैसे ही विश्व मे गहरा रहे जल संकट से लड़ने के लिए एक जुट होंवे।

IWIS के 5-दिन के विचार-विमर्श के माध्यम से गंगा और अन्य नदियों के संरक्षण समन्वित विकास के साथ अर्थ गंगा की अवधारणा का महत्व और उसके आयाम दृढ़ता से उभरें हैं।

पुस्तकविमोचन: शिखर सम्मेलन के दौरान, माननीय मंत्रियों और मुख्य अतिथियों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण पुस्तिकाओ का विमोचन किया गया, विशेष रूप से:
1) भारत और विदेशों में व्यापक प्रसार के लिए मुद्रित जी.आर.बी.एम.पी. रिपोर्ट
2) “जोजरी पुनरुद्धार एवं संरक्षण”
3) “पुनरुद्धार एवं संरक्षण के पथ पर कान्ह नदी”।
4) गंगा नदी के बेसिन में हिलसा शाद का जीवविज्ञान और मत्स्य पालन (Biology and Fisheries of Hilsa Shad in Ganga River Basin)

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