आईआईटी कानपुर में सतत ऊर्जा अनुसंधान के लिए अभियांत्रिकी विभाग की स्थापना

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ब्यूरो चीफ़ आरिफ़ मोहम्मद कानपुर

अपने प्रारम्भिक दिनों से ही, आई आई टी कानपुर भारत में अनेक विशिष्ट शैक्षिक एवं शोध कार्यक्रमों के सूत्रपात के लिए प्रसिद्ध है। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संस्थान ने अब सतत ऊर्जा अभियांत्रिकी के क्षेत्र में एक नया विभाग शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस विभाग का उद्देश्य अपने शैक्षिक व शोध कार्यक्रमों के माध्यम से देश की ऊर्जा सततताव आत्मनिर्भरता में सहयोग देना है। संस्थान के निदेशक प्रोफ़ेसर अभय करंदीकर ने बताया कि 7 दिसंबर 2020 को हुई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में नए विभाग की स्थापना की स्वीकृति मिल गई है। आईआईटी कानपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ के. राधाकृष्णन ने कहा कि इस क्षेत्र में एक शैक्षणिक विभाग शुरू करना देश की शैक्षिक और प्रौद्योगिकी विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कोरोना महामारी से हुए व्यवधानों के बावजूद संस्थान द्वारा इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए संस्थान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस विभाग की शुरुआत ऐसे समय पर हो रही है जब भारत सरकार ने पेरिस पर्यावरण अनुबंध के तहत वर्ष 2030 तक,40% से अधिक ऊर्जा का उत्पादन स्वच्छ एवं नवीनीकृत तरीकों से करने का बीड़ा उठाया है। प्रोफेसर करंदीकर ने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब भारत कई क्षेत्रों में ऊर्जा सततता से संबंधित तकनीकों में एक वैश्विक ताकत बनना चाहता है, यह विभाग इस लक्ष्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा।
देश की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं में भागीदार बनने के लिए विभाग उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले स्नातक एवं परास्नातक शैक्षिक कार्यक्रमों का संचालन करेगा। निदेशक प्रोफेसर करंदीकर ने कहा कि नए विभाग के शैक्षणिक कार्यक्रमों का उद्देश्य पारंपरिक इंजीनियरिंग, विज्ञान और मानविकी के उपयुक्त विषयों को ऊर्जा सततता के परिपेक्ष्य में सही संतुलन में पढ़ाना है जिससे विद्यार्थियों में बहुमुखी क्षमताओं का विकास होगा। पाठ्यक्रम उनको सम्पूर्ण इंजीनियर के रूप में प्रशिक्षित करेगा जिससे वो ऊर्जा सततता के क्षेत्र में उद्योग जगत के साथ-साथ अकादमिक और अनुसंधान संगठनों के लिए भी मूल्यवान होंगे ।
इसके साथ विभाग ऊर्जा सततता से संबंधित स्वच्छ, नवीन एवं वैकल्पिक ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान करेगा। प्रोफेसर करंदीकर ने बताया कि विभाग की शोध गतिविधियों को मुख्यतः चार क्षेत्रों यानी ऊर्जा विकास और उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और वितरण, वैकल्पिक ईंधन तथा ऊर्जा, पर्यावरण और नीति के तहत वर्गीकृत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की पुरजोर कोशिश मूल शोध को ऊर्जा संबंधी तकनीकों के विकास तक पहुंचाने और उनके व्यवसायीकरण पर होगी और ये गतिविधियां भारत सरकार द्वारा स्थापित प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप होंगी। नए विभाग से संबन्धित प्रयासों का समन्वयन कर रहे प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कहा कि आरंभ में विभाग के शोध का जोर वायु, सौर व अन्य स्वच्छ तरीकों से ऊर्जा उत्पादन, बैटरीव सुपरकैपेसिटर, विभिन्न माध्यमों से ऊर्जा का भंडारण, ऊर्जा वितरण व स्मार्ट ग्रिड, कार्बन अवशोषण, वैकल्पिक व स्वच्छ ईंधन, अपशिष्ट का ऊर्जा में परिवर्तन, स्वच्छ जल एवं ऊर्जा से संबंधित आर्थिक मुद्दों व नीतियों पर रहेगा। भविष्य में विभाग के बढ़ने और परिपक्व होने के साथ शोध विषयों के दायरे में और विस्तार होगा।
पिछले दशक में, आई आई टी कानपुर ने वैश्विक प्रसार अभियान के तहत विश्व की अनेक अग्रणी संस्थाओं से कई साझेदारियां की हैं। इनमें, ऊर्जा क्षेत्र में संस्थान की अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी के साथ एक साझेदारी भी है, जिसके परिणामस्वरूप एक सहयोगी अनुसंधान केंद्र का निर्माण किया गया है जो नए विभाग का भी हिस्सा होगा। व्यापक प्रभाव के लिए विभाग अग्रणी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ इस तरह की और सहभागिताओं को स्थापित करेगा।
विभाग शैक्षिक एवं शोध कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन के लिए आवश्यक अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं को बनाने के लिए आर्थिक संसाधन भी जुटाएगा और विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं से करार करेगा। विभाग को प्रारंभ करने की मुहिम में अमेरिका स्थित मेहता फैमिली फाउण्डेशन आगे आया है जिसके अध्यक्ष व मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री० राहुल मेहता ने नए विभाग की स्थापना पर संस्थान को बधाईयां दीं और कहा कि “इस विभाग का खुलना भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को मद्देनजर रखते हुए भारत के लिए एक उचित कदम है”। श्री मेहता ने कहा कि “फाउण्डेशन इस महत्वपूर्ण यात्रा में विभाग के साथ साझेदारी करेगी व विभाग एवं राइस-आईआईटीके सहयोगात्मक शोध केंद्र को ऊर्जा सततता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करते हुए देखना चाहेगी जिससे कि देश की अगली पीढ़ी को इस क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा मिले”।

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