चिनहट में बोलती है खनन माफियाओं की तूती

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लखनऊ से समूह संपादक मनीष गुप्ता

लखनऊ का चिनहट क्षेत्र, अपराध की दुनिया का एक नया अड्डा बनता जा रहा है lजरायम की दुनिया से जुड़े हुए तमाम कारनामे, इस क्षेत्र में अक्सर सुर्ख़ियों की वजह बनते हैं , खासतौर से खनन माफियाओं के लिए चिनहट का पूरा क्षेत्र एक मुफीद जगह बन गया है lमिट्टी का खनन अवैध रूप से लगातार जारी है lवैसे तो यहां साल दर साल खनन माफियाओं का हौसला बढ़ता जा रहा है ,मिट्टी की अवैध कटान लगातार जारी है lअवैध खनन को बल उस समय मिला था, जब रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट आउटर रिंग रोड पर मिट्टी डालने का काम शुरू हुआl खनन माफियाओं ने आनन-फानन में अपना दिमाग लगाया और खनन विभाग से मिट्टी की खनन का परमिट ले लिया ,लेकिन अगर 1 दिन में 15 डंपर मिट्टी डाली जानी होती है तो माफिया 10 डंपर रिंग रोड के लिए और पांच डंपर अवैध रूप से बेचने के लिए हमेशा तैयार रहें l जब जब इन लोगों से पूछा गया तब यह बताया गया कि यह डंपर आउटर रिंग रोड के लिए जा रहे हैं ,लेकिन सफेद कागज के पीछे काली स्याही से दस्तखत यह माफिया बहुत धड़ल्ले से करते हैं l चिनहट पुलिस की मिलीभगत से यह धंधा सालों से फल फूल रहा है,हालत यह है कि अगर पुलिस का कोई भी बंदा इन परमिटदारो से अपनी सेटिंग करने पहुंचता है ,तो थाने के आला अधिकारी उसे धमका कर चुप बैठा देते हैं और खुद सारी उंगलियां घी मे और सिर कढ़ाई में रखना चाहते हैं lचिनहट ब्लॉक के मेहोरा ,लिकोरिया और पपना मऊ में आज भी अवैध खनन जोरों पर है lसमाचार भारती को मिली जानकारी के मुताबिक अभी हाल में ही चिनहट थाने में अवैध खनन को लेकर आपसी खींचातानी भी हुई ,थाने का एक हमराही और दरोगा के संरक्षण में यह कारोबार फल-फूल रहा था लेकिन इस दरोगा का अभी 20 दिन पहले ट्रांसफर कर दिया गया l माफियाओं के तेवर तो वही है लेकिन तरीके बदल गए हैं अब अवैध खनन की मिट्टी जेसीबी में नहीं बल्कि ट्रैक्टर ट्रॉली से 15- 15 और 20 -20 की तादात में बाहर भेजी जा रही है, तालाब तक खोद दिया गया है lसमाचार भारती ने खनन अधिकारी सुशील कुमार से जब जानकारी ली तो उन्होंने कहा ” चिनहट में परमिट जारी नहीं किए गए हैं वहां आउटर रिंग रोड के चलते कुछ ही लोगों को परमिट जारी किए गए हैं ,उन्होंने जानकारी सही होने पर ताबड़तोड़ कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है lअब देखना यह है खनन माफियाओं के हौसलों को पस्त करने के लिए स्थानीय प्रशासन कितनी सक्रियता दिखा पाता है यह कह पाना बहरहाल मुश्किल है l



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