जालौन जिले में मनाया गया शुद्ध वायु सप्ताह

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जालौन से राहुल दुबे की रिपोर्ट
कोरोना काल में खतरनाक हो सकता है वायु प्रदूषण
मनाया जा रहा अंतर्राष्ट्रीय शुद्ध वायु सप्ताह
12 सितंबर तक चलेगा अभियान
जालौन, 08 सितंबर 2020।
कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए सभी एहतियात बरते जा रहे हैं वहीँ वातावरण में बढ़ता प्रदूषण इस संक्रमण को और बढ़ा रहा है। पर्यावरण को साफ स्वच्छ रखने के उद्देश्य से आज वायु प्रदूषण सप्ताह के अंतर्गत अपर निदेशक डॉ वीके सिन्हा की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय वेबिनार का आयोजन किया गया। यह सप्ताह 12 सितंबर तक मनाया जाएगा।
अपर निदेशक ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि हम भोजन के बिना तो कुछ दिन जीवित रह सकते हैं लेकिन वायु के बिना बिलकुल भी नहीं रह सकते है। वायु प्रदूषण से टीबी, अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमें वातावरण और प्रकृति को संरक्षित करना है, जिससे आने वाली पीढिय़ों को बेहतर कल का भविष्य दे सके। उन्होंने बताया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम स्कूल खुलने के बाद सभी बच्चों का कोविड टेस्ट करने के साथ ही वायु प्रदूषण के प्रभाव और उसे रोकने के तरीके के बारे में बताएगी। साथ ही आशाएं गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल भ्रमण के दौरान माँ और बच्चे पर वायु प्रदूषण के प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगी।
संयुक्त निदेशक डॉ रेखारानी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन वायु प्रदूषण के संदर्भ में दो अहम विषयों पर कार्य कर रहा है इसमें वायु प्रदूषण के प्रभाव से शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य को बचाना है। बचपन से शुरू करे तो वायु प्रदूषण का खतरा सबसे अधिक गर्भस्थ शिशुए बच्चा और माँ पर पड़ता है। यदि माँ के माध्यम से गर्भवस्थ शिशु को स्वच्छ हवा नहीं मिल रही या उसका श्वसन तंत्र सही रूप से नही चल रहा है तो उस बच्चे के विकास में प्रभाव पड़ेगा, यहाँ तक कि समय से पूर्व गर्भपात या मृत बच्चा भी पैदा हो सकता है। यह एक संवेदनशील विषय है। इस पर लोगों में समझ पैदा करना बहुत जरूरी है। इस सप्ताह के माध्यम से हम लोग मंडल की सभी गर्भवतियों तक यह संदेश पहुंचाना चाह रहे हैं कि स्वच्छ हवा लेना स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
सिफ्सा एनएचएम के मंडलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वायु प्रदूषण के प्रभावों और इसको कैसे रोक सकते है, इसके बारें में बताया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास है कि जलवायु परिवर्तन से मानव जीवन को जो खतरे उत्पन्न हो रहे है, उसके प्रति जागरूक किया जाए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण चीज है हवा। स्वच्छ वातावरण के लिए स्वच्छ वायु का होना बहुत जरूरी हैए क्योंकि हमारा सारा शरीर ऑक्सीजन पर निर्भर है।
वेबिनार में मंडलीय क्वालिटी सलाहकार डॉ राजेश पटेल सहित सभी मंडलीय जिलों के नोडल अधिकारी, डीसीपीएम, एचईआईओ, बीसीपीएम और एमओआईसी शामिल रहे।

ऐसे रोक सकते हैं वायु प्रदूषण
मंडलीय परियोजना प्रबंधक का कहना है कि निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें, क्योंकि सड़क पर जितनी कम गाडिय़ां रहेंगी उतना कम प्रदूषण भी होगा। अपने बच्चों को निजी वाहन से स्कूल छोडऩे की जगह स्कूल बस में जाने के लिए प्रोत्साहित करें। साइकिल का इस्तेमाल करें इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता और स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करें, घरों के आसपास या खेतों व बगीचों में सूखी पत्तियों को जलाने की जगह उनका खाद बनाकर इस्तेमाल करें। इससे आपके पेड़, पौधों को फायदा होगा और पत्तियां जलाने से धुआं भी नहीं होगा। साथ ही वृक्ष जरूर लगाएं।

ऐसे करें बचाव
माँ ही है जिसे अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य पर ध्यान देना है, ऐसे में वह ऐसी चीजों से बचे जिसका उसके और उसके बच्चे के ऊपर प्रभाव पड़े। जैसे खाना बनाते समय गैस का इस्तेमाल करेए जिनके पास गैस नहीं है तो वह ऐसी जगह पर खाना बनाए जहां धुआँ का संग्रहित न होने पाये और धुआँ ऐसे कमरों में न जाए कि जहां उसे आराम करना हो या उसका बच्चा लेटा हो। यदि परिवार में कोई धूम्रपान करता होए उसको इसके लिए रोके या धूम्रपान करते समय उसके नजदीक परिवार का अन्य सदस्य न हो। घर के अंदर धूम्रपान तो बिल्कुल न करने दे।

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