मुर्दे भी बोलते जिंदा की बोली

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कानपुर में मुर्दा इंसान हुआ जिंदा

ब्यूरो चीफ़ आरिफ़ मोहम्मद कानपुर

पैसे के लालच में जिन्दा को मुर्दा और मुर्दे को जिन्दा कर देते है लापरवाह अस्पताल

यूपी के कानपुर में लापरवाही की हद तब पार हो गई जब जिंदा आदमी को मुर्दा बता उसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी दे दिया जी हां
कल्याणपुर थाना क्षेत्र के आवास विकास के रहने वाले वीरेंद्र कुमार उम्र 63 वर्ष है। डाक विभाग से रिटायर्ड है। की 26 अगस्त को तबीयत बिगड़ने पर कल्याणपुर के एसपीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था जहां लापरवाह डॉक्टरों ने कोरोना पॉजिटिव बताकर मरीज को करोना वार्ड में भर्ती कर लिया। फिर अस्पताल प्रशासन ने 1 लाख 20 हजार रुपये लेकर इलाज करते रहे और एक के बाद एक जांच कराई और हर जांच पॉजिटिव बतायी।

परिजनों के संदेह होने पर अगली जांच कानपुर के जिलाअस्पताल हैलट में कराई जहां उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई।

फायदा न होने पर परिजनों ने पास में बने प्रीति हॉस्पिटल में 3 सितंबर को भर्ती कराकर इलाज कराना शुरू कर दिया। कई दिन बीतने के बाद जब परिजनों ने डॉक्टर से मरीज का हालचाल माँगा तो डॉक्टर ने हालात नाजुक बताई। महज दो घंटे बात मरीज के बेटे गौरव को बुला कर हॉस्पिटल संचालक डॉ पवन ने बताया कि पिता की मौत हो चुकी है। दुखी परिवार ने डॉक्टर की बात सुनकर अपने पिता के शव व डॉक्टर के द्वारा बनाये गए मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर घर चले आये। घर पहुचते ही मृतक को जैसे ही बर्फ पर लिटाया तो ठण्डक की बजह से हरकत होते देख सभी लोग हैरान हो गये तभी बेटा गौरव ने पास में बने क्लिनिक से डॉक्टर को बुला कर लाया तो नब्ज देखने से पता चला कि वीरेंद्र की अभी मौत ही नही हुई है। जबकि हार्ट वीट और पल्स बराबर चल रही है। इतना सुनकर परिजन कानपुर के कार्डियोलॉजी अस्पताल लेकर दौड़े जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ परिजनों को शव उनके हवाले कर दिया।

बड़ा सबाल ये है। कि अगर मरीज जिंदा था तो कैसे निजी अस्पताल ने उसको मृत घोषित कर दिया कहीं न कहीं अस्पताल की बड़ी लापरवाही से मरीज़ वीरेंद्र की जान तो नहीं चली गयी इसका जिम्मेदार कौन…?

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