योगी की सरकार में अपराधी बन जाए जोगी वरना खैर नहीं

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योगी जी की येही नीति रही तो नही बचेगा प्रदेश मे कोई अपराधी

लखनऊ- से वरिष्ठ संवाददाता अभिषेक गौड़

बात 2001 की है जब प्रदेश मे भाजपा की सरकार थी, प्रदेश मे सत्ता मे होने के बावजूद विकास दुबे ने थाने मे भा.जा.पा नेता संतोष शुक्ला
की हत्या की थी, मगर उसका कानूनी फैसला गैर सरकार मे आया था।
उस वक़्त विकास दुबे के खिलाफ़ किसी ने गवाही नही दी थी, और पर्याप्त सुबूत ना मिल पाने की वजह से वो बरी हो गया था।

उस वक़्त की सरकार ने ठीक से पैरवी ना करने वाले पुलिस कर्मियों पर कोई कार्यवाही तक नही की थी, तब की निर्बल यू.पी. पुलिस और आज की योगी सरकार की यू.पी. पुलिस का मनोबल इस कदर बढ़ गया है कि, विकास दुबे जैसे कुख्यात अपराधी के खिलाफ़ तमाम विपक्षियों के सवाल के परवाह किये बगैर मोर्चा लेने से पीछे नही हट रही है।

वर्तमान सरकार मे एसे अपराधियोँ के खिलाफ़ जो अभियान चल रहा है उससे पुलिस की कार्यवाही मे बदलाव को तो मानना ही पडेगा। और इसकी मुख्य वजह है प्रदेश की योगी सरकार जो अपराधियोँ के खिलाफ़ शक्ति से पेश आ रही है।

10 जुलाई 2020 का दिन प्रदेश के दो बड़े शातिर गैंगस्टर विकास दुबे और पन्ना यादव के लिये काल साबित हुआ, एक तरफ 8 पुलिस के जवान की हत्या मे फरार शातिर विकास दुबे था तो दूसरी तरफ देखे तो बहराइच मे गोरखपुर जेल से भागे 50 हज़ार का अपराधी पन्ना यादव को भी मुठभेड़ मे मार गिराया गया।

योगी सरकार का मकसद साफ तौर पर देखा जा सकता है, अपराधी या तो अपराध छोड़ दे या दुनिया योगी जी की येही नीति रही तो नही बचेगा प्रदेश मे कोई अपराधी
और सरकार की ये नीति सभी अपराधियोँ के लिये कायम रहनी चाहिये।

इसके साथ ही यू.पी पुलिस के बीच एसे विभीषन का चेहरा भी बेनकाब होना बहुत आवश्यक है जो अपने ही साथियों का साथ ना देकर विकास दुबे जैसे अपराधियोँ का साथ देते है। और अपराधियोँ के आगे समाज के रखवाले अपने ईमान से गद्दारी कर लेते है।

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