रिहाई के बाद डॉक्टर कफील कांग्रेस में होंगे शामिल

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समाचार संपादक मीनाक्षी वर्मा की रिपोर्ट

रिहाई के बाद डाॅक्टर कफील खान ने राजस्थान में ली शरण…..!

कांग्रेस में शामिल होंगे ? भाई सपा के संपर्क में: योगी के विरोध का चेहरा बनकर उभरे कफील खान

परिवार के सदस्य भी जयपुर के रिजाॅर्ट में पहुंचे

कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर, शाहनवाज आलम के साथ कफील खान

लखनऊ/जयपुर। गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता रहे चर्चित डाॅक्टर कफील खान ने रिहाई के बाद राजस्थान में ली शरण ! कांग्रेस महासचिव
प्रियंका गांधी से लेकर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक के संपर्क में हैं कफील खान। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोध का चेहरा बनकर उभरे हैं डॉ. कफील खान ? यूपी में विधानसभा चुनाव भले ही अभी डेढ़ साल के बाद होने हों, लेकिन सियासी बिसात अभी से बिछाई जाने लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विरोध का चेहरा बन चुके डॉ. कफील खान की सूबे के मुस्लिम समुदाय के बीच अच्छी खासी लोकप्रियता देखने को मिली है, ऐसे में राजनीतिक पार्टियां डॉ. कफील खान को अपने-अपने पाले में लाने के लिए उत्सुक नजर आ रही हैं, इस कवायद में सपा से आगे कांग्रेस निकलती दिख रही है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रासुका हटाए जाने के बाद मथुरा जेल से रिहाई के बाद डॉ. कफील खान ने जयपुर में गुरुवार को प्रेस कॉन्फेंस के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ-साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का भी समर्थन व सहयोग के लिए धन्यवाद किया। डॉ. कफील खान को मथुरा जेल के गेट से लेकर जयपुर तक ले जाने का काम कांग्रेस नेताओं ने किया।कफील खान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के संपर्क में हैं, प्रियंका गांधी की सलाह पर ही वो राजस्थान गए हैं। इस बात को कफील खान खुद भी स्वीकार कर रहे हैं कि प्रियंका गांधी ने उनकी मदद की है और उनके कहने पर ही वे जयपुर आए हैं। वह कहते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए हम यहां सुरक्षित रह सकते हैं। हमारे परिवार को भी ऐसा ही लग रहा है, क्योंकि यूपी जाएंगे तो कोई न कोई केस लगाकर फिर से हमें जेल में डाल दिया जाएगा। डाॅक्टर कफील खान के परिवार के सदस्य भी जयपुर पहुंच गए हैं, जिनमें उनकी मां, पत्नी, बच्चे और भाई फिलहाल जयपुर के एक रिजाॅर्ट में ठहरे हुए हैं। डाॅक्टर कफील खान की रिहाई से लेकर जयपुर तक साथ मौजूद उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम का कहना है कि हमारी पार्टी हर उस निर्दोष के साथ खड़ी है, जिसके साथ योगी सरकार सूबे में अत्याचार और जुल्म करने का काम कर रही है। सीएए-एनआरसी के विरोध मामले में योगी सरकार ने बेगुनाह जिन लोगों को फंसाया है, उन सभी से प्रियंका गांधी संपर्क में हैं और कांग्रेस उनकी लड़ाई लड़ रही है। कांग्रेस के पूर्व विधायक दल के नेता प्रदीप माथुर ने कहा, ‘मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर कफील खान के मामले को लेकर मथुरा और अलीगढ़ के जिला प्रशासन के साथ नियमित रूप से संपर्क में था।
डाॅक्टर कफील के भाई सपा के संपर्क में. . . . !
उधर डॉ. कफील खान की भले ही कांग्रेस के साथ फिलहाल बॉंडिंग दिख रही हो, लेकिन सपा भी उन्हे अपने पाले में लाने की कवायद कर रही है। सूत्रों की मानें तो कफील खान के भाई कासिफ जमाल पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संपर्क में हैं, इन दिनों कासिफ भी कफील खान के साथ जयपुर में हैं। यही वजह है कि डॉ. कफील खान प्रियंका के साथ-साथ अखिलेश यादव का भी धन्यवाद कर रहे हैं‌। सपा प्रवक्ता और पूर्व मंत्री अताउर्रहमान कहते हैं कि डॉ. कफील खान सपा में आते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे। उनका कहना है कि सूबे में सपा ही योगी सरकार के खिलाफ मजबूती से लड़ रही है। कफील खान की रिहाई के लिए कांग्रेस ने सिर्फ बयानबाजी करने का काम किया है, असल लड़ाई तो सपा नेताओं ने लड़ी है। कांग्रेस का न तो सूबे में कोई जनाधार है और न ही संगठन। कफील खान सपा में आते हैं तो निश्चित तौर पर उन्हें एक राजनीतिक मजबूत ताकत मिलेगी।
”सरकार से डरकर हम चुप नहीं बैठेंगे”. . . . .
इस बीच डॉ. कफील खान ने कहा है कि हम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए बिहार, असम, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक का दौरा करेंगे। हम योगी सरकार से डर कर चुप नहीं बैठ सकते हैं, राजनीति में आने को लेकर अभी तो कई फैसला नहीं किया है। हालांकि, प्रियंका गांधी ने हमारी बहुत मदद की है, कांग्रेस ने हमारी रिहाई के लिए बहुत संघर्ष किया है और सपा ने भी हमारे हक में आवाज उठाई। अखिलेश यादव ने रिहाई के लिए ट्वीट कर हमारी मदद की है। दरअसल, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी में सरकार बनने के बाद से डॉ. कफील खान को तीन बार जेल भेजा जा चुका है। पहली बार अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके लिए डॉ. कफील को निलंबित कर जेल में डाल दिया गया था। वे करीब 9 महीने जेल में रहे थे, इसके बाद 2018 में उन्हें एक 9 साल पुराने मामले में बहराइच से गिरफ्तार किया गया था, इस दौरान दो महीने जेल में रहे। तीसरी बार उन्हे फरवरी 2020 में अलीगढ़ से गिरफ्तार किया था। सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के मामले में योगी सरकार ने उन पर एनएसए लगा दिया था।
यूपी की राजनीति में मुस्लिम सियासत. . . . .
उत्तर प्रदेश में राजनीति की बात की जाए तो करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। सूबे की 403 विधानसभा सीटों में से 143 सीटें मुस्लिम प्रभावित मानी जाती हैं, इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी बीस से तीस फीसदी के बीच है जबकि 73 सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान तीस फीसदी से ज्यादा हैं‌। सपा जब 2012 में सत्ता में आई थी तो उसे मुस्लिम बहुल 72 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं 2017 में मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा कमल खिलाने में कामयाब रही थी जबकि कांग्रेस मुस्लिम सीट पर खाता भी नहीं खोल सकी थी। ऐसे में अब कांग्रेस की नजर मुस्लिम वोट बैंक पर है और वो कफील खान के जरिए साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

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