विकास दुबे एक अनसुलझी पहेली

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-कुल मिलाकर विकास दुबे के खत्म होते ही सारे सवाल भी हमेशा के लिए दफन हो गए–

लखनऊ से समूह संपादक मनीष गुप्ता की रिपोर्ट

विकास दुबे को पुलिस ने कानपुर से 30 किलोमीटर दूर भौंती नाम की जगह पर मार गिराया है, पुलिस के मुताबिक उज्जैन से उसे सड़क के रास्ते लाया जा रहा था तभी काफिल में शामिल एक वाहन पलट गया इसका फायदा उठाकर उसने भागने की कोशिश जिसमें पुलिस ने उसे मार गिराया है लेकिन पुलिस की इस थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं, जब विकास दुबे ने बड़े आराम से खुद को सरेंडर किया और उसे पता था कि अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा यानी एनकाउंटर का खतरा टल चुका था तो भागने की कोशिश क्यों करेगा, गौरतलब है कि विकास दुबे के मामले में पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध रही है और उसके एक गुर्गे ने कैमरे के सामने बोला है कि उसे पकड़ने के लिए पुलिस आ रही है इसकी सूचना उसे थाने से ही दी गई है, दूसरी ओर कुछ मीडिया रिपोर्टस की मानें तो उज्जैन में जब उससे पूछताछ की जा रही थी तो वहां भी उसने कबूला था कि उसकी मदद में कई पुलिस चौकियां शामिल थीं, कुल मिलाकर विकास दुबे के खत्म होते ही ये सवाल भी हमेशा के लिए दफन हो गए।

कुछ सवाल ऐसे जिनके जवाब अगर विकास दुबे दे देता तो कई नप जाते..

कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों के मारने के बाद आखिरकार विकास दुबे उज्जैन कैसे पहुंचा। कौन-कौन से पुलिसवाले उसकी मदद कर रहे थे। किनकी मदद से ग्वालियर में उसके लिए फर्जी आधार कार्ड बनवाया गया विकास दुबे के ऊपर किन नेताओं का हाथ था और किनकी मदद से उससे पुलिस महकमा खौफ खाता था, यहां तक कि एसटीएफ के बड़े अधिकारी का भी उससे संबंध था।2022 में क्या वो विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर था। अगर ये बात थी तो वो किन-किन पार्टियों से टिकट के लिए संपर्क में था।साल 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुरेश शुक्ला की हत्या के मामले में जब वह बरी हुआ तो किसके दबाव में इस मामले में दोबारा अपील नहीं की गई। क्या विकास दुबे का एनकाउंटर किसी दबाव में किया गया है क्योंकि इससे कई लोगों का राजफाश होने की आशंका थी जिसमें लगभग सभी पार्टियों को लोग शामिल थे। क्या उज्जैन में उसका आत्मसमर्पण कराने के लिए भी कई लोग शामिल थे क्योंकि जब 7 राज्यों की पुलिस अलर्ट पर थी तो वो किसी के गिरफ्त में क्यों नहीं आया। सीओ देवेंद्र मिश्रा की उस कथित चिट्ठी का सच क्या था जो सोशल मीडिया और मीडिया के हाथ लग गई जिसमें उन्होंने पुलिस और विकास दुबे के गठजोड़ की बात कही थी, जबकि इस चिट्ठी के बारे में कहा जा रहा है कि वह रिकॉर्ड में नहीं है। आखिर पुलिस-प्रशासन के ऊपर किसका दबाव था या फिर उसे वास्तव में नहीं पता था कि विकास दुबे ने इतने हथियार इकट्ठा कर रखे हैं। क्या विकास दुबे अपनी गैर-कानूनी तरीके से कमाई गई रकम का कुछ हिस्सा पुलिसकर्मियों में भी बांटता था और अगर ये सच था तो कौन-कौन इसमें शामिल था। वो कौन लोग थे जिनके दबाव में विकास दुबे  का जिले या प्रदेश के टॉप-10 बदमाशों में शामिल नहीं था जबकि उसके ऊपर 60 मुकदमे चल रहे थे

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