वित्त मंत्री ने बजट में पेश किया विजन-30, जानें- अगले दस साल में कौनसे दस काम करेगी सरकार

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को संसद में अंतरिम बजट 2019-20 पेश किया. उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के अहम मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अगले एक दशक के लिए एक विजन पेश किया है. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे, जहां गरीबी, कुपोषण, गंदगी और निरक्षरता बीते समय की बातें होंगी. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत एक आधुनिक, प्रौधोगिक से संचालित, उच्च विकास के साथ एक समान और पारदर्शी समाज होगा. परिकल्पना-30 में वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि अगले दस साल में कौनसे दस काम करेगी सरकार…

ये दस काम करेगी सरकार

  1. 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और सहज-सुखद जीवन के लिए भौतिक और सामाजिक अवसंरचन का निर्माण करना है.
  2. एक ऐसे डिजिटल भारत का निर्माल करना है, जहां हमारे युवा वर्ग डिजिटल भारत के सृजन में व्यापक स्तर पर स्टार्ट-अप और इको-सिस्टम में लाखों रोजगार पैदा करते हुए इसका नेतृत्व करेगा.
  3. भारत को प्रदूषण मुक्त राष्ट्र बनाने के लिए इलेक्ट्रिकल वाहनों और नवीकरण ऊर्जा पर विशेष ध्यान देना.
  4. आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके ग्रामीण औधोगीकीकरण विस्तार के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना.
  5. सभी भारतीयों के लिए सुरक्षित पेयजल के साथ स्वच्छ नदियां और लघु सिंचाई तीकनों को अपनाने के माध्यम से सिंचाई में जल का कुशल उपयोग करना.
  6. सागरमाला कार्यक्रम की कोशिशों में तेजी लाने के साथ भारत के तटीय और समुद्री मार्गों के माध्यम से देश के विकास को सशक्त बनाना.
  7. हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम-गगनयान, भारत दुनिया के उपग्रहों को छोड़ने का ‘लॉन्च पैड’ बन चुका है और 2022 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना इस आयाम को दर्शाता है.
  8. सर्वाधिक जैविक तरीके से खाद्यान्न उत्पादन और खाद्यान्न निर्यात में भारत को आत्म निर्भर बनाना और विश्व की खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद्यान्नों का निर्यात करना.
  9. 2030 तक स्वस्थ भारत और एक बेहतर स्वास्थ्य देखभाल एवं व्यापक आरोग्यकर प्रणाली के साथ-साथ आयुष्मान भारत और महिला सहभागिता भी इसका एक अहम घटक होगा.
  10. भारत को न्यूनतम सरकार, अधिकतम अभिशासन वाले एक ऐसे राष्ट्र का रूप देना, जहां एक चुनी हुई सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले सहकर्मियों और अधिकारियों के अभिशासन को मूर्त रूप दिया जा सकता है.

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