IIT कानपुर का नया शोध करेगा मानव मन का अध्ययन, छात्रों के भविष्य और करियर के लिए होगा अहम

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ब्यूरो चीफ़ आरिफ़ मोहम्मद कानपुर

आईआईटी कानपुर देश की सभी आईआईटी में होगा पहला, जिसके पास होगा संज्ञानात्मक विज्ञान का पूर्ण विभाग

आईआईटी कानपुर ने संज्ञानात्मक विज्ञान विभाग की स्थापना करके अपने शैक्षणिक विभागों के तहत एक नए एवं विशिष्ट पाठ्यक्रम के संचालन को मंजूरी प्रदान कर दी है। उल्लेखनीय है कि 7 दिसंबर, 2020 को आयोजित संचालक मंडल की बैठक में इस विभाग की स्थापना को अंतिम रूप दिया गया है । इससे पूर्व देश की प्रसिद्ध संज्ञानात्मक विज्ञान विशेषज्ञों से जुड़ी एक टीम ने जुलाई 2019 में आईआईटी कानपुर का भ्रमण किया था । इस दल ने एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति के अंग के रूप में आईआईटी कानपुर में एक संज्ञानात्मक विज्ञान विभाग के गठन की पुरजोर सिफारिश की इस विभाग के गठन से निश्चित रूप से शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में विश्वस्तरीय उपलब्धि हासिल होगी।

संज्ञानात्मक विज्ञान- मनोविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, न्यूरो साइंस, भाषा विज्ञान तथा दर्शन सहित कई विषयों के साथ इंटरफेस का कार्य करेगा तथा व्यक्तिगत एवं सामाजिक व्यवहार की बहुआयामी व्याख्या उपलब्ध कराएगा । संज्ञानात्मक विज्ञान के अनुप्रयोगों में प्रभावी अध्ययन, मानसिक विकारों के लिए उपचारतथा सॉफ्टवेयर कंपनियों द्वारा प्रयुक्त किए जाने वाले बेहतर उपयोगकर्ता इंटरफेस के विकास हेतु बेहतर समझ तथा विकसित विधियां शामिल हैं । संज्ञानात्मक विज्ञान से संबंधित योगदान कृत्रिम बुद्धि, संज्ञानात्मक-रोबोट आदि के विकास के लिए भी मूल्यवान सिद्ध हुए हैं।

इस नये प्रयास के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर आईआईटी सिस्टम में संज्ञानात्मक विज्ञान के रूप में एक संपूण विभाग की स्थापना करने वाला देश का पहला संस्थान होगा । आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो0 अभय करंदीकर ने इस अवसर जानकारी दी कि “संज्ञानात्मक विज्ञान के लिए एक अलग विभाग के गठन की इस श्रेष्ठ पहल से आईआईटी कानपुर में संज्ञानात्मक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहन प्राप्त होगा । नया विभाग इस कमी को पूरा करेगा तथा भारत को संज्ञानात्मक विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगा। प्रस्तावित विभाग न्यूरोसाइंस से संबंधित क्षेत्रों पर जैव विज्ञान तथा जैविक अभियांत्रिकी जैसे विभागों के साथ मानसिक प्रक्रियाओं तथा इंटरफ़ेस में शामिल मस्तिष्क तंत्र का अध्ययन करेगा । नया विभाग कंप्यूटर विज्ञान तथा इंजीनियरिंग विभाग के साथ मिलकर नई कृत्रिम बुद्धि(AI) तथा मशीन-लर्निंग इंटरफेस को विकसित करने का काम भी करेगा। प्रोफेसर. करंदीकर ने आगे यह भी जानकारी दी कि इस नये विभाग के अंतर्गत चेतना अध्ययन, धारणा एवं प्रक्रिया, निर्णय तथा तार्किकता, भाषा प्रसंस्करण, सामाजिक अनुभूति, एप्लाइड संज्ञानात्मक विज्ञान (एचएमआई / एचसीआई, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य) और रोबोटिक्स जैसे अनुसंधान क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित होगा।

संचालक मंडल के अध्यक्ष डॉ0 के. राधाकृष्णन ने बताया कि, भारत के पास मस्तिष्क एवं चेतना से संबंधित श्रेष्ठ ज्ञान का भंडार है फिर भी यह आश्चर्यजनक तथा खेद का विषय है कि हम मानव मस्तिष्क के अध्ययन में अन्य देशों से पीछे हैं ।

इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि आईआईटी कानपुर ने 1 जून 2017 को संज्ञानात्मक विज्ञान में एक अंतर विषयक पाठ्यक्रम की स्थापना करके औपचारिक रूप से संज्ञानात्मक विज्ञान के क्षेत्र में प्रवेश कर लिया था । इस अंतर विषयक पाठ्यक्रम में कंप्यूटर विज्ञान तथा अभियांत्रिकी विभाग, मानविकी तथा सामाजिक विज्ञान, जैव विज्ञान एवं जैविक अभियांत्रिकी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग तथा गणित एवं सांख्यिकी विभागों के अनेक संकाय सदस्यों का सक्रिय सहयोग एवं भागीदारी रही है ।

संज्ञानात्मक विज्ञान के इस अंतर विषयक पाठ्यक्रम के वर्तमान प्रमुख प्रोफेसर बिशख भट्टाचार्य ने जानकारी दी कि “संज्ञानात्मक विज्ञान में पीएचडी तथा एमएस प्रोग्राम चला रहे हैं, जहां कई छात्र संज्ञानात्मक विज्ञान में अनुसंधान तथा संबंद्ध प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं । हमारे छात्रों ने अपने अनुसंधान कार्यों के लिए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है । उदाहरण के लिए सुश्री0 अंजलि सिफर ने कनाडा में आयोजित कॉग्निटिव साइंस सोसायटी के अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन में प्रतिष्ठित 2020 मार्र पुरस्कार जीता । साथ ही हमारे छात्रों ने एसोसिएशन ऑफ कॉग्निटिव साइंस इंडिया -2019 के वार्षिक सम्मेलन में बेस्ट ओरल तथा बेस्ट पोस्टर प्रेजेन्टेशन पुरस्कार भी जीते हैं ।

आईआईटी कानपुर में नवगठित संज्ञानात्मक विज्ञान विभाग राष्टीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर परसंज्ञानात्मक विज्ञान कार्यक्रम के एक के रूप में अपनी अग्रणी पहचान बनाने का भरसक प्रयास करेगा । आशा की जाती है कि इस नए विभाग के गठन से न केवल देश तथा विदेश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं आकर्षित होगी बल्कि नई शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप इनोवेशन के लिए एक अगुवा के रूप में आईआईटी कानपुर की विश्व स्तरीय छवि को प्रोत्साहन भी मिलेगा ।

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